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सिद्ध आश्रम के सारे दुर्लभ विडियो को देखें सकते हैं.

यह सारे विडियो सेमरी आश्रम के नवरात्र उत्सव के हैं

पूज्य गुरूजी श्रीमान महाराजाधिराज लालसाहब सरकारजी का आवाहन करते हुए
URL : http://www.youtube.com/watch?v=RurSD7oa6ms
पूज्य गुरूजी श्रीमान महाराजाधिराज लालसाहब सरकारजी का आवाहन करते हुए..........
हर सोमवार को सिद्ध आश्रम में चौरा लगता है. पूज्य गुरूजी सभी भक्तों के कल्याण हेतु आश्रम में रविवार को ही आ जाते हैं. पूज्य गुरूजी पहले बाबाजी के चौरा को प्रणाम करते हुए परिक्रमा के उपरांत भगवान शंकर और हनुमान का पूजन, मालार्पण और आरती करते हुए चौरा पर जाकर बैठते हैं. इसी दौरान भक्त गण उनकी स्तुति करते हैं. गाय के गोबर की पवित्र उपरी का जालकर गर्म करके चौरा पर हवन कुण्ड में रखा जाता है. सभी लोग "सीता-राम, सीता-राम, राधे-श्याम, राधे-श्याम" का जाप करते हैं. पूज्य गुरूजी गंगाजल छिड़क कर पूज्य श्रीमान महाधिराज लाल साहब जी का आवाहन करते हैं. लोग अपना दुःख, तकलीफें, समस्या को लिखित रूप में दरखास अधिकारीओं द्वारा पहुंचाते हैं. पूज्य गुरूजी द्बारा आवाहन करने पर प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्रीमान महाराधिराज लाल साहब सरकारजी पूज्य गुरूजी के शरीर में प्रकट होते हैं. वे साक्षात् भगवान विष्णु के अवतार हैं. अपने पर्व काल में वे क्षत्रिय थे. उसी दौरान यह पहले ही घोषणा की जाती है कि कोई ब्राहमण (क्योंकि वे स्वयं क्षत्रिय होकर उच्च ब्रह्मण से हाथ नहीं जुड़वाना चाहते एवं ११ वर्ष से छोटी कन्या (क्योंकि कन्या स्वयं देवी स्वरुप होती हैं) उन्हें प्रणाम नहीं करेंगे. लोगों को चमड़े की बनी वस्तुयों को धारण नहीं करना चाहिए. लोग पूज्य गुरूजी को ही गुरूजी कहें अन्य किसी अधिकारीओं को नहीं.
परम पूज्य श्रीमान महाराजाधिराज लालसाहब सरकार जी की आरती
URL : http://www.youtube.com/watch?v=V3sZz89yerc
परम पूज्य श्रीमान महाराजाधिराज लालसाहब सरकार जी की आरती....
श्रीमान लाल साहब जी साक्षात् भगवान विष्नुजी के अवतार हैं. अपने पूर्व काल में वे राजाओं और महाराजाओं के भी रजा अर्थात महाराजाधिराज थे. बाबाजी की कृपा से वे लोक कल्याण में कार्यात हो गये. उनके प्रकट होने पर यह पहले ही घोषणा की जाती है कि कोई ब्राहमण (क्योंकि वे स्वयं क्षत्रिय होकर उच्च ब्रह्मण से हाथ नहीं जुड़वाना चाहते एवं ११ वर्ष से छोटी कन्या (क्योंकि कन्या स्वयं देवी स्वरुप होती हैं) उन्हें प्रणाम नहीं करेंगे. लोगों को चमड़े की बनी वस्तुयों को धारण नहीं करना चाहिए. लोग पूज्य गुरूजी को ही गुरूजी कहें अन्य किसी अधिकारीओं को नही. उनके प्रकट होने पर पूज्य गुरूजी की स्थिति जीवन मृतु के सामान हो जाती है. उन्हें कुछ भी आभास नहीं होता. बहुत तकलीफ होती है. पूज्य सरकारजी जब सारी दरखास का जवाब देकर चले जाते हैं, तभी पूज्य गुरूजी को सब कुछ अपने आप ज्ञात हो जाता है. हमारे लिए कितने शारीरिक तकलीफ और पीडा झेलते हैं. वे सदा से ही प्य्ज्नीय हैं.
इस युग में हमें अपना आशीर्वाद और कृपा दृष्टि का पात्र बनने हेतु अवतरित हुए हैं. आप चौरा पर सभी भक्त्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं. भक्त्त गण आपसे अपने समस्या, परेशानियाँ, महाभयंकर रोग, कष्ट इत्यादि लिखकर दरखास आपकी चरणों में रखते हैं. उन सभी भक्त्तों के कार्य सफल होने का आशीर्वाद देते हैं. आप किसी भी भक्त्त को निराश नहीं करते. आपकी छात्र छाया सभी भक्त्तों पर सदा रहती है. बाबाजी के साथ जुड़ने पर वे स्वयं भक्त्तों के दरखास का उत्तर बिना पढ़े देते हैं. हम सभी भक्त्त अपना दुखड़ा लिख कर आपके दया का पात्र बनने के लिए सदा से देते चले आये हैं. आपका आश्वासन रुपी उत्तर से मन प्रसन्न हो जाता है. सारे जग का कल्याण आप ही के द्बारा होता है.
पूज्य गुरूजी परम पूज्य बाबाजी का आवाहन करते हुए
URL : http://www.youtube.com/watch?v=MwBaipvfXUs
पूज्य गुरूजी परम पूज्य बाबाजी का आवाहन करते हुए....
हर सोमवार को सिद्ध आश्रम में चौरा लगता है. पूज्य गुरूजी सभी भक्तों के कल्याण हेतु आश्रम में रविवार को ही आ जाते हैं. पूज्य गुरूजी पहले बाबाजी के चौरा को प्रणाम करते हुए परिक्रमा के उपरांत भगवान शंकर और हनुमान का पूजन, मालार्पण और आरती करते हुए चौरा पर जाकर बैठते हैं. इसी दौरान भक्त गण उनकी स्तुति करते हैं. गाय के गोबर की पवित्र उपरी का जालकर गर्म करके चौरा पर हवन कुण्ड में रखा जाता है. सभी लोग "सीता-राम, सीता-राम, राधे-श्याम, राधे-श्याम" का जाप करते हैं. पूज्य गुरूजी गंगाजल छिड़क कर पूज्य श्रीमान महाधिराज लाल साहब जी का आवाहन करते हैं.
पूज्य सरकारजी के दर्शन और सारी दरखास के अंत के बाद यदि समय अनुकूल हो तभी पूज्य बाबाजी के पावन दर्शन होते हैं. तदानंतर पूज्य गुरूजी बाबाजी का आवाहन करते हैं. बाबाजी के दुर्लभ दर्शन को मन व्याकुल रहता है.
परम पूज्य बाबाजी के प्रकट होने पर सभी भक्त्त गण बबा बाण गाकर स्तुति करते हुए
URL : http://www.youtube.com/watch?v=s2W__qQ5vsk
परम पूज्य बाबाजी के प्रकट होने पर सभी भक्त्त गण बबा बाण गाकर स्तुति करते हुए...
बाबाजी के प्रकट होने पर वातावरण पवित्र हो जाता है और मन शांत चित्त होकर सिर्फ उन्हें निर्हने के आलावा कुछ नहीं करता. उनके मुख से प्रवचन सुनकर मन प्रफुल्ल हो उठता है. उनकी स्तुति में सभी भक्तगण बबा बाण का जाप करते हैं. बाबाजी सारे सिद्ध आश्रमों के प्रमुख शक्ति हैं. आप साक्षात् भगवान शिव शंकर के अवतार हैं. आप भोलेनाथ की तरह भक्त्त-वत्सल और निर्मल स्वभाव के हैं. सभी भक्तों पर सदा ही सुख बरसाते हैं. प्राणीमात्र की, सम्पूर्ण को, आप प्रतिक्षण पूर्ण करते हैं. हमारे लिए जो शुभ तथा हितकर है उसे तुम बिना मांगे हमारी झोली में डालते हैं. आपके आँचल में, शान्ति तथा आनंद का वास है. आपकी चरणशीतल छाया में परम तृप्ति का आभास होता है. आपकी महिमा अपरम्पार है, उसका गुणगान करना उसी तरह है, जैसे सूरज को दीपक दिखाना. आपकी पूजा के पश्चात किसी की भी पूजा शेष नहीं रह जाती. आप सर्वाधार सर्वेश्वर, सर्वान्तर्यामी, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक भगवान है. आप को मन से, वचन से और कर्म से भक्त्ति करनेवाला अनंत ब्रह्म सुख को प्राप्त कर लेता है.
बाबाजी भोलेनाथ की तरह अत्यन्त दयालु एवं स्वभाव से निर्मल, भक्तवत्सल, कृपालु हैं. आप की मात्र दृष्टि से दीन दुखियों के दर्द दूर हो जाते हैं. आप के पुरे देश में ५६३ शक्त्ति स्थान हैं. उनमें से एक इलाहाबाद के निकट करछना के सेमरी गावँ में ५६३ वां स्थान है, उस स्थान के पुजारी हमारे पूज्य गुरूजी (पं. राजेंद्र प्रसाद मिश्र) हैं. उन्ही परम पूज्य गुरूजी के आग्रह पर आपने अपने सेमरी सिद्ध आश्रम को रायबरेली में स्थानांतरित करवा दिया. १६ फरवरी २००९ से चौरा स्थापित हो गया है. आप का आवाहन करने पर आप प्रकट होकर सबकी पीड़ा दूर कर आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
परम पूज्य गुरूजी एवं गुरुमाताजी सत्यनारायण पूजा करते हुए
URL : http://www.youtube.com/watch?v=l9gxsrd3tu8
परम पूज्य गुरूजी एवं गुरुमाताजी सत्यनारायण पूजा करते हुए...
हर वर्ष की भातिं दोनों नवरात्र में सत्यनारायण की पूजा का आयोजन होता है. पूजा में स्वयं पूज्य गुरूजी एवं गुरु माताजी भाग लेते हैं. पूजा का आयोजन भंडारे के पहले होता है. पूजा के पश्चात् सभी भक्त्त गण पूज्य गुरूजी एवं गुरु माताजी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. उस दिन पूज्य गुरूजी कन्याओं को आशीर्वाद रुपी सिक्का देते हैं.
परम पूज्य गुरूजी एवं गुरुमाताजी हवन करते हुए
URL : http://www.youtube.com/watch?v=_nCfrCvHlpc
परम पूज्य गुरूजी एवं गुरुमाताजी हवन करते हुए...
हर वर्ष की भातिं दोनों नवरात्र में सत्यनारायण की पूजा का आयोजन होता है. पूजा में स्वयं पूज्य गुरूजी एवं गुरु माताजी भाग लेते हैं. पूजा का आयोजन भंडारे के पहले होता है. पूजा के बाद में सभी भक्त्त गण पूज्य गुरूजी एवं गुरु माताजी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. पूजा के पश्चात् हवन में स्वयं पूज्य गुरूजी एवं गुरु माताजी आहुति देते हैं.

तो आइये उनके पावन दर्शन और सांनिध्य पाकर हम अपना जीवन धन्य कर लें.

एक बार प्रेम से बोलो " गुरुदेव भगवान की जय " ......

रक्षा कवच

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