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" सिद्ध आश्रम शक्ति स्थल " |
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शक्त्ति क्या है
१. इस विषय में गुरूजी ने कहा ये हमारा व्यक्तिगत मामला है. हमारे पास कुछ भी नही है ये सब का आशिर्वाद है.
२. भगवान निरंकार है. वह किसी को दिखाई नही देता ज़रूरत पड़ने पर अपनी मर्ज़ी से साकार रूप धारण करता है. तो हम आपकी मर्ज़ी से क्या बतायें.
३. आप मानते है या नहीं ये आप का विचार है. हम मानते हैं ये हमारे विचार हैं.
४. हम किसी को ऐसा ज्ञान या दबाव नहीं देते की आप मानें.
५. हम पूजा, आराधना करते हैं लोग आ जाते हैं. उनका फायदा होता है वे जाने. |
क्या भूत-प्रेत हैं?
१. गुरूजी ने बताया "हाँ" आत्मायें भटकती है पर इतनी नहीं जितना लोग मानते हैं. अकाल मौत से मरने वाला व्यक्ति अपने शेष बची उम्र का २० गुना भाग प्रेत योनी में तब भोगता है जब उसका समुचित क्रियाक्रम ना हो, पिण्डदान - श्राद्ध ना हो या लाश ना मिले.
२. आज कल के लोग भगवान को नहीं मानते तो भूत-प्रेत को क्या मानेंगे.
३. हर दिमाग के विचार अलग हैं.
४. हर व्यक्ति अपनी मर्ज़ी का मालिक है.
५. हमारा काम है भगवान की पूजा-पाठ करना उनके बताये मार्ग पर चलना आप ना मने हम क्या कर सकते हैं. |

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