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सिद्ध आश्रम : बसंतपुर, हंसापुर, तिराहा, कुचरिया, रायबरेली >>>कैसे आयें ?<<<
यह रायबरेली सिद्ध आश्रम का वर्तमान है जिसे हम इतिहास में याद रखेंगे.![]()
>>>सावन उत्सव<<< >>>नवरात्र महोत्सव <<<
यह आश्रम सभी धर्मों के लिए सदैव खुला रहता है. यहाँ कोई भेद-भाव नहीं करता. हम परम पूज्य गुरूजी के प्रचारक नही हैं, अपितु उनके अनन्य भक्त्त हैं. हम समाज कल्याण हेतु उनकी महिमा का गुणगान कर रहे हैं ताकि दीन दुखियों के जीवन उनके दर्शन मात्र से सार्थक हो जाये. यहाँ के सारे कार्य भक्त्ति से सम्बंधित है. आप को विश्वास हो तो आयें अन्यथा नही. ढोंग, पाखंड से दूर रहा जाता है. पूज्य गुरूजी का कार्य पूजा-पाठ, हवन करना है लोग अपने आप नाम सुन कर आते हैं तो उन्हें भगाया नही जाता. किसी भी व्यक्ति को गुरूजी नही बुलाते. नाही कोई भी गुरूजी का प्रचारक है. आप शक्त्तियों को नही मानते तो आप वहां ना जायें. पूज्य गुरूजी ये नही बताते कि हमने आपको कैसे ठीक किया. वे कहते हैं हम तो कुछ भी नही जानते ये सब हमारे माता, पिता, बड़े बुजुर्ग का आशिर्वाद, भगवान कि कृपा, हमारे कई जन्मों का संचित कर्म तथा उन सभी का आशिर्वाद , जिन्हें हम ठीक करते हैं. वह सब मिलकर ही हमे दूसरों को ठीक करने की ताकत देते हैं. |
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ये आश्रम में सभी भक्त्तों के कल्याण हेतु बना है. यहाँ आने वालों के साथ जात पात का विरोध नहीं होता. यहाँ सबका स्वागत है. ब्रह्मनिष्ठ परम पूज्य श्री गुरूजी का संपूर्ण जीवन इतना अधिक सादा और सरल है कि उनको देखकर किसीको यह विचार भी नही आता है कि इस शुभ्रवेश में एक महान ब्रह्मनिष्ठ संत रात दिन लोक-कल्याण में रत है उन्हीं के पावन सान्निध्य में रहकर जिन्होंने आत्मज्योति जलाई ऐसे ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद श्री गुरूजी द्वारा वही कार्य इस प्रकार प्रचार हो रहा है जैसे एक बीज विशाल वटवृक्ष के रूप में फूल फल रहा हो ..... |
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एक बार प्रेम से बोलो " गुरुदेव भगवान की जय " ......
