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सिद्ध आश्रम की शुरुवात
सन् १९८३ में एकाएक गुरूजी पागल जैसे होकर एक माह तक घूमते रहे. फिर एक पीपल के वृक्ष पर एक हफ्ते तक चढ़ कर बैठे रहे. लोगों की भीड़ लगी और अगस्त सन् १९८३ से ये आश्रम शुरू हुआ. यहाँ पर एक दुसरे से सुन कर लोग आने लगे.
कार्य :
१. अनगिनत लोगों को पुत्र की प्राप्ति.
२. ग्रह, व्याधाओं की शान्ति.
३. कैंसर, शुगर, ऐड्स जैसे असाध्य रोग : टी बी, दमा, साँस सम्बन्धी अन्य मर्ज़ के साथ मिरगी, चक्कर, के रोगियों को आराम मिलता है.
४. भूत, प्रेत, पिशाच, नज़र, टोना, मुकदमा, गरीबी, बेरोजगार लोगों को भी रहत मिलता है.
५. कोई भी असंभव कार्य को सम्भव बनाने का प्रयास होता है.
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नियम :
१. यहाँ के सारे कार्य भक्त्ति से सम्बंधित है.
२. आप को विश्वास हो तो आयें अन्यथा नही.
३. ढोंग, पाखंड से दूर रहा जाता है.
४. गुरूजी का कार्य पूजा-पाठ, हवन करना है लोग अपने आप नाम सुन कर आते हैं तो उन्हें भगाया नही जाता.
५. किसी भी व्यक्ति को गुरूजी नही बुलाते.
६. नाही कोई भी गुरूजी का प्रचारक है.
७. आप शक्त्तियों को नही मानते तो आप वहां ना जायें.
८. गुरूजी ये नही बताते कि हमने आपको कैसे ठीक किया.
९. वे कहते हैं हम तो कुछ भी नही जानते ये सब हमारे माता, पिता, बड़े बुजुर्ग का आशिर्वाद, भगवान कि कृपा, हमारे कई जन्मों का संचित कर्म तथा उन सभी का आशिर्वाद , जिन्हें हम ठीक करते हैं, वह सब मिलकर ही हमे दूसरों को ठीक करने कि ताकत देता है.
१०. गुरूजी किसी भी डॉक्टर के पास जाने से या अन्य जगह दर्शन करने से किसी को नही रोकते.
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क्या यहाँ से किसी को कुछ फायदा है???
गुरूजी ने बताया ये तो जनता ही बता सकती है.
पता चला है कुछ लोगों को डॉक्टर ने जवाब दिया है, तो कैंसर के मरीज़ २० वर्ष तक वे गुरूजी के शरण में स्वस्थ हैं नाम बहुत है. ज़रूरत पड़ने पर कुछ नाम बता रहे हैं सबका याद नही है.
१. श्यामधर तिवारी कि पत्नी उर्मिला तिवारी आज से ५ - ६ वर्ष कैंसर से पीड़ित पहले बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती थी गुरूजी ने बुलाकर ठीक किया ६ वर्ष से वह स्वस्थ है.
२. अवधेश चतुर्वेदी (नटराज) संग्राम पट्टी से दवा की मुह में कैंसर था. आज से २० वर्ष पहले गुरूजी ने ठीक किया आज वे गुरूजी की शरण में है.
३. इन्द्रप्रकाश दुबे की माँ का इलाज टाटा में भी हुआ और डॉक्टर (जगजीवन राम हॉस्पिटल मुंबई) से जवाब दे दिया ४-५ महीने से गुरूजी के शरण में जीवित और स्वस्थ है.
४. कुंदन पाण्डेय (आर.पी.एफ.) के जवान हैं उनकी पत्नी को भी कैंसर है बनारस में दवा हो रही है. गुरूजी की शरण में आने पर उन्हें जीवन-दान मिला है और आराम है.
५. महादेवी वर्मा ३ वर्ष पहले चल फिर नही पति थी गुरूजी के शरण में आने पर चलने लगी.
६. रविंद्रनाथ उर्फ़ डब्लू पोलियो ग्रस्त था. गुरूजी के यहाँ आने पर चलने लगे और सेवा में जुटें हैं.
७. रमेश शर्मा (मुंबई) को पुत्र की प्राप्ति हुई.
८. जयेश केसरिया (मुंबई) ५ वर्ष पहले गरीब थे. गुरूजी से जुड़े अब तो अच्छे से खाते कमाते हैं.
९. विनोद शुक्ला (मुंबई) में टैक्सी चालक हैं गुरूजी से मिलने के बाद बताते हैं "हम फुटपाथ पर रहते थे और आज हमारे पास मकान, गाड़ी के साथ गुरूजी की कृपा से पुत्र भी मिला है.
१०. शशी यादव हिसामपुर (जौनपुर) की बताती हैं "हमे स्तन कैंसर था गुरूजी के यहाँ जाने से ठीक हुआ और पुत्र भी मिला.
११. पूनम मिश्रा को भी स्तन कैंसर था गुरूजी के यहाँ जाने से ठीक हुआ और पुत्र भी मिला.
१२. इन्द्रप्रकाश दुबे मुंबई में रेल कर्मचारी हैं हार्ट के मरीज़ है एक बार डॉक्टरों ने उन्हें मृत समझकर हटाने को कहा गुरूजी को सिर्फ़ फ़ोन किया और वे ठीक हो गए. जब भी हार्ट में दर्द होता है तो फ़ोन पर ही हम ठीक कर देते हैं.
१३. विब्भो भारदे (धोबी तलाव - मुंबई) की बताती हैं कि हम मुक़दमे से चुके थे ऐसा हमारा वकील कह के फ़ैसला बिना हुए भाग गया. हमे गुरूजी को फ़ोन किया गुरूजी ने कहा कि जज तुम्हारे पक्ष में ही होगा और हुआ भी. दोबारा अपील हुई तो गुरूजीने कहा पुनः जीतोगी पुनः हम जीते.
१४. इसी प्रकार शिला राजेंद्र शर्मा बड़ा गाँव बनारस को पुत्र धन प्राप्त हुआ २० वर्ष पहले.
१५. आसमा (मण्डी मुंडेरा -इलाहाबाद) बताने लगी की हमारे भाई नही थे. गुरूजी ने वह भी दिया.
१६. कई ने बताया हमारा सफ़ेद दाग ठीक हुआ इस प्रकार असंख्य कार्य किये हैं पूज्य गुरूजी ने.
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कैसे ठीक होता है - सिर्फ़ भभूत देते हैं
आज तक इस आश्रम के द्वारा ३० लाख लोगों का भला हुआ है.
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वेशभूषा गुरूजी की :
साधारण लोगों की भांति: कुर्ता-पायजामा, पैन्ट, शर्ट पहनना, दाढ़ी-जटा नहीं है. |

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