गुरूजी का जीवन |
गुरूजी का संदेश |
गुरूजी की महिमा |
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" गुरुदेव भगवान की जय " |
संस्कृत में "गु" शब्द का अर्थ अन्धकार या अज्ञान है और "रु" का अर्थ 'दूर करनेवाला' है. अन्धकार या आवरणरुपी अज्ञान का नाश करने के कारण वे "गुरु" कहलाते हैं. गुरु, ईश्वर, ब्रह्म, आचार्य, उपदेशक, दैवी गुरु आदि सब समानार्थी शब्द हैं. जैसे अग्नि के पास बैठने से ठण्ड, भय, अन्धकार दूर होता है वैसे ही जो भक्त्त या शिष्य गुरूजी के पास रहता है उसके अज्ञान, मृत्यु का भय तथा सब अनिष्टों का नाश होता है.पारस पत्थर में लोहा छू जाने से सोना बनता है लेकिन गुरु वह पारस पत्थर है कि जिसे छू लें वह सोना नहीं पारस पत्थर ही बन जाता है और वह भी सोना बनाने लगता है या पारस पत्थर.जिस प्रकार पिता या पितामह की सेवा करने से पुत्र या पौत्र खुश होता है इसी प्रकार गुरु की सेवा करने से मन प्रसन्न होता है. गुरु, मन्त्र एवं इष्टदेव में कोई भेद नहीं मानना चाहिये. गुरु ही इश्वर है. जिस स्थान में गुरु निवास कर रहे हों वह स्थान कैलाश है. जिस घर में वह रहते है वह काशी या वाराणसी है. उनके पावन चरणों का पानी गंगाजी स्वयं है. उनको पावन मुख से उच्चारित मंत्र रक्षणकर्ता ब्रह्मा स्वयं ही है.गुरु की मूर्ति ध्यान का मूल है. गुरु के चरणकमल पूजा का मूल है. गुरु का वचन मोक्ष का मूल है. गुरु तीर्थस्थान हैं. गुरु अग्नि हैं. गुरु सूर्य हैं. गुरु समस्त जगत हैं. समस्त विश्व के तीर्थस्थान गुरु के चरणकमलों में बस रहे हैं. ब्रह्मा, विष्नु, शिव, इन्द्र आदि सब देव और सब पवित्र नदियाँ शाश्वत काल से गुरु की देह में स्थित है.अगर गुरु प्रसन्न हों तो भगवान प्रसन्न होते हैं. गुरु नाराज हो तो भगवान नाराज होते हैं. गुरु इष्टदेवता के पितामह हैं.तो आऔ नम्रतापूर्वक, स्वेच्छापूर्वक, संशयरहित होकर, बाह्य आडम्बर के बिना, द्वेष रहित बनकर, असीम प्रेम से अपने गुरुजी की सेवा करें. |
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गुरूजी का जीवन : ब्रह्मनिष्ठ परम पूज्य श्री गुरूजी का संपूर्ण जीवन इतना अधिक सादा और सरल है कि उनको देखकर किसीको यह विचार भी नही आता है कि इस शुभ्रवेश में एक महान ब्रह्मनिष्ठ संत रात दिन लोक-कल्याण में रत है उन्हीं के पावन सान्निध्य में रहकर जिन्होंने आत्मज्योति जलाई ऐसे ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद श्री गुरूजी द्वारा वही कार्य इस प्रकार प्रचार हो रहा है जैसे एक बीज विशाल वटवृक्ष के रूप में फूल फल रहा हो.पूज्य गुरूजी का जीवन लोक कल्याण हेतुही हुआ है. वे बहुत तपस्वी और सरल स्वाभाव के हैं. वे अत्यन्त कठोर नियम से जप-तप, पूज्य-ध्यान और तपस्या करते हैं. सभी भक्त्त गणों को मालूम होगा कि वे साल में कई माह तो पेय पदार्थ, तो कई माह सिर्फ़ रोटी और नमक खाकर, तो कई माह पेडों की पत्तियाँ खाकर, तप कभी ज़मीन पर लेट कर ही जीवन निर्वाह करते हैं. ऐसे सच्चे संत, सर्वेश्वर, महात्मा, योगसामार्थ्य से संपन्न, निर्लोभी, परम करुणावान महापुरुष गुरुवर हमारा कल्याण हेतु ही जन्म लेकर इस धरती को भी पावन कर दिया है. तो आओ उनके दर्शन से जीवन सफल बनायें. |
गुरूजी का संदेश : |
गुरूजी की महिमा : |
गुरूजी का ध्यान : |
गुरूजी की वेशभूषा : साधारण लोगों की भांति: कुर्ता-पायजामा, पैन्ट, शर्ट पहनना, दाढ़ी-जटा नहीं है. |
गुरूजी से संपर्क : पूज्य गुरूजी का निवास: ग्राम : मधुवन, पोस्ट : ममूनी, जनपद : रायबरेली, राज्य : उत्तर-प्रदेश संपर्क : 09415792637. इस वक़्त पूज्य गुरूजी का निवास रायबरेली शहर में है. या हर सोमवार को आश्रम में आकर पूज्य गुरूजी के दुर्लभ दर्शन कर सकते हैं. अन्य जानकारी के लिये अधिकारीओं से संपर्क करें. |
