मुख्य-द्वार की तरफ़

पूज्य गुरूजी का मुंबई में आगमन

पूज्य गुरूजी मुंबई में ५ जनवरी २०१० से २१ जनवरी २०१० का मुंबई में शुभ आगमन
परम पूज्य श्री श्री १००८ श्री राजेंद्र प्रसाद मिश्र (गुरूजी)
का भव्य प्रवचन दिनांक ६ जनवरी से ९ जनवरी तक
समय शाम ६ बजे से ८ बजे तक
स्थान : मनोरमादेवी सोमानी हॉल, श्री बालाजी मंदिर,
जैन हॉस्पिटल के नजदीक, चरनी रोड(पूर्व), मुंबई - २.
--------------------------------------------------------------------------
पूज्य गुरूजी मुंबई में ५ जनवरी २०१० से २१ जनवरी २०१० का मुंबई में शुभ आगमन
परम पूज्य श्री श्री १००८ श्री राजेंद्र प्रसाद मिश्र (गुरूजी)
का भव्य प्रवचन दिनांक १५ जनवरी से १७ जनवरी तक
समय शाम ७ बजे से १० बजे तक
स्थान : अप्पा पाढ़ा, मारुती सेवा संघ, रिक्शा स्टैंड के पास,
सुदामा नगरी, मालाड (पूर्व), मुंबई - ९७.
-------------------------------------------------------------------

 

पूज्य गुरूजी मुंबई में ५ जनवरी २०१० से २१ जनवरी २०१० का मुंबई में जल्द आगमन
परम पूज्य गुरूजी का मुंबई में जल्द आगमन. पूज्य गुरूजी मुंबई में ५ जनवरी २०१० से २१ जनवरी २०१० तक भक्तों को अपना आशिर्वाद और मार्गदर्शन देने आने वाले हैं. इसी दौरान विविध कार्यक्रम का आयोजन होने वाला है, जैसे पूज्य गुरूजी का आगमन, पूजन-हवं इत्यादि और मुख्यतः मलाड (पु) में प्रवचन का आयोजन. भक्तों से विनंती है कि वे इस शुभ अवसर का लाभ उठायें और अपना सहयोग दें. .
" पूज्य गुरूजी मुंबई में " " पूज्य गुरूजी का मुंबई में प्रवचन "

जप-तप-ध्यान-भजन में सहयोगी ऐसे ब्रह्मनिष्ठ, सच्चे संत महात्मा, योगसामार्थ्य से संपन्न, निर्लोभी, परम करुणावान महापुरुष आज कहाँ हैं? अगर हैं तो पहाडों, जंगलों, गुफाओं के एकांत का ब्रह्मानंद छोड़कर समाज में रहते हुए हमें प्राप्त हो सकते हैं? जी हाँ,
पूज्य गुरूजी का मुंबई में आगमन सदा की भातिं पुष - माघ के दौरान ही होता है. सभी भक्त्तों पर अपनी कृपा दृष्टि और आशीर्वाद बरसाने आते हैं. वे सदा ही लोक कल्याण की कार्यों में लगे रहते हैं.
तो आऔ नम्रतापूर्वक, स्वेच्छापूर्वक, संशयरहित होकर, बाह्य आडम्बर के बिना, द्वेष रहित बनकर, असीम प्रेम से अपने गुरुजी की सेवा करें.
पूज्य गुरूजी का पावन प्रवचन हर वर्ष मुंबई के मलाड (पू) के अप्पापाडा इलाके में भव्य रूप में आयोजित किया जाता है. मलाड के सारे भक्त्त गण पुरे श्रद्धा से पंडाल एवं सारे कार्य करते हैं.
पूज्य गुरूजी राम चरित्र मानस के प्रवक्ता हैं, उनके मुख से प्रवचन सुन कर ऐसे लगता है, मनो अमृत बरस रहा हो. समय का ज्ञात ही नहीं होता.
किसी ने सच ही कहा है " गुरु की मूर्ति ध्यान का मूल है. गुरु के चरणकमल पूजा का मूल है. गुरु का वचन मोक्ष का मूल है. गुरु तीर्थस्थान हैं. गुरु अग्नि हैं. गुरु सूर्य हैं. गुरु समस्त जगत हैं. समस्त विश्व के तीर्थस्थान गुरु के चरणकमलों में बस रहे हैं. ब्रह्मा, विष्नु, शिव, इन्द्र आदि सब देव और सब पवित्र नदियाँ शाश्वत काल से गुरु की देह में स्थित है."

रक्षा कवच

Copyright © 2009 Siddh-Ashram.Raebareli.U.P.India All Rights Reserved.