गुरु भक्ति योग |
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सिद्धांत |
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शिष्य |
मंत्र जाप |
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" गुरुदेव भगवान की जय " |
जिस प्रकार शीघ्र ईश्वर दर्शन के लिए कलयुग में भजन-कीर्तन-साधना-प्रवचन है, उसी प्रकार इस वर्तमान काल में नास्तिकता, अंहकार के युग में गुरु एवं गुरु की भक्ति तथा कृपा से ही आपके जीवन काल में अमोघ प्रभाव देता है.अपने अभिमान को निर्मूल करने के लिए तथा विषमय अंहकार को पिघलाने के लिए गुरु भक्ति योग ही सबसे उत्तम तथा फलदायी मार्ग है. जिस प्रकार किसी रोग के विषाणु निर्मूल करने के लिए किसी विशेष प्रकार की जंतुनाशक दवाई आवश्यक है उसी प्रकार अविद्या एवं अंहकार के नाश के लिए गुरु भक्ति सबसे प्रभावशाली, अमूल्य और निरंतर उपचार का मार्ग है.
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गुरु भक्ति योग के अंश
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गुरु भक्ति योग के सिद्धांत
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गुरु भक्ति योग का महत्त्व
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गुरु भक्ति योग के लिए योग्यता :
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योग का अभ्यास गुरु के सान्निध्य में करना चाहिए. विशेषतः तंत्रयोग के बारे में यह बात अत्यंत आवश्यक है. साधक कौन सी कक्षा का है, यह निश्चित करना एवं उसके लिए योग्य साधना करना गुरु का कार्य है. आजकल साधकों में एक ऐसा खतरनाक एवं गलत ख्याल प्रवर्तमान है कि वे साधना के प्रारंभ में ही उच्च प्रकार का योग साधने के लिए काफी योग्यता रखते हैं. प्रायः सब साधकों का जल्दी पतन होता है इसका यही कारण है. इसीसे सिद्ध होता है कि अभी वह योग साधना के लिए तैयार नहीं है.
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